रविवार, 14 दिसंबर 2008

जॉर्ज बुश पर जूतों की बरसात

(तस्वीर- सौ. बीबीसी हिन्दी)
अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को उनका आखिरी इराक दौरा ताउम्र याद रहेगा। दुनिया के सबसे ताकतवर इनसान को सपने में भी गुमान न होगा कि कोई उस पर जूतों की बरसात कर देगा। 14 दिसंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश अचानक इराक पहुंच गये। इस दौरान राष्ट्रपति ने उनका भरपूर स्वागत किया। दोनों देशों के बीच सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षार भी हुए। लेकिन इस दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसे जॉर्ज बुश जिंदगी भर नहीं भूला पाएंगे। जॉर्ज बुश इराकी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकि के निजी ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। तभी अल बगदादिया न्यूज चैनल के पत्रकार मुंतजेर अल जैदी ने गालियों के साथ बुश पर जूते फेंके। हालांकि वे जूते बुश को नहीं लगे। फुर्तीले बुश ने बमुश्किल अपने आप को बचाया। जूते उनके सिर के उपर से निकल गये। ये वाकया कई सवाल खड़े करता है? क्या इराक के लोग अमेरिकी मदद से आजिज आ गये हैं? क्या अब उन्हें अमेरिकी फौजों की जरूरत नहीं है? क्या अमेरिका को अपनी फौज जल्द वापस बुला लेनी चाहिए ? जूते खाते खाते बचे बुश साहब जरा इन सवालों पर गौर फरमाइये।

2 टिप्‍पणियां:

अफ़लातून ने कहा…

कौशलजी , इस ऐतिहासिक घटना की ओर ध्यान खींचने के लिए मेहरबानी ।

रात का अंत ने कहा…

जरा सोचिये अगर वो भारतीय नेता होते तो जूते खा ही जाते और पता नहीं फिर इराक का क्या होता