मंगलवार, 26 अगस्त 2008

जान बचाने की खातिर... बाढ़ में लड़ाई....


बिहार में प्रलय की स्थिति है। पूर्णियां जिले में भी बाढ़ ने विकराल रूप धर लिया है। मेरे गांव में अभी तक बाढ़ नहीं आई है लेकिन पड़ोस के गांव पानी में डूब रहे हैं। रात पापा से फोन पर बात हुई। मेरे गांव में भी लोग बाढ़ से बचने की तैयारी में जुटे हैं। एक बात जो पापा ने बताई दिल दहला गया। बच्चों की लाशें पानी में यू ही बह रही हैं। लोग उसे निकालकर जहां तहां दफना रहे हैं। गांव में आबादी वाली जगहों को छोड़ खेतों में पानी भरा है और लगातार स्तर बढ़ता ही जा रहा है। बाढ़ की इस विकराल स्थिति के बीच जान बचाने के लिए लोग आपस में लड़ने मरने को तैयार बैठे हैं। मेरे गांव के पास ही एक बांध ही जिसका जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। दूसरी तरफ के लोग पानी में डूबे हुए हैं। मेरे गांव की तरफ के लोग बांध को और भी ऊंचा करने में लगे हैं। इस काम में एक दो नहीं बल्कि एक हजार के करीब लोग अंजाम दे रहे हैं। उनके हाथों में फावड़ा लाठी डंडा है। वहीं दूसरी तरफ के लोग जोकि पानि से बेहाल हैं बांध को तोड़ने पर आमाद हैं आप महज अंदाजा भर लगा सकते हैं कि वहां किस तरह की स्थिति होगी। एक तरफ के लोग तोड़ने के लिए मौके की तलाश में है तो दूसरी तरफ के लोग रात रात भर जागकर बांध की पहरेदारी कर रहे हैं। दोनों तरफ से मार काट जैसी स्थिति बनी हुई है। लोगों की संख्यां दोनों तरफ से बढ़ती ही जा रही है। इस बीच कुछ बुजुर्गों ने दोनों तरफ सहमति बनाने की सोची और बाढ़ में परेशान लोगों को अपनी तरफ आ जाने की पेशकश की है। लेकिन हजारों की संख्यां में फंसे लोगों को ला पाना आसान काम भी तो नहीं। अब दो स्थिति बन रही है एक तो कभी भी मार काट मच सकती है। दूसरी अगर प्रकृति ने खुद ही चाहा तो बांध टूट सकता है। और फिर इस तरफ के लोग भी बाढ़ में बहेंगे। लोग न चाहकर भी एक दूसरे की जान के दुश्मन बने बैठे हैं। वहीं प्रशासन को अभी तक इस स्थिति की जानकारी नहीं है। अगर है भी तो वे कुछ भी करने से मजबूर हैं। अब इस प्रलय से लोगों को भगवान ही बचाए।