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केन उपनिषद् के महत्वपूर्ण मंत्र

For UGC NET-JRF  ओम केनेषितं पतति प्रेषितं मन:।। ((किससे सत्ता स्फूर्ति पाकर मन जो विषयों में जाता है..)) चक्षु: श्रोतं क उ देवो युनक्ति।। ((नेत्र और कान को कौन नियुक्त करते हैं)) न तत्र चक्षुर्गच्छति, न वाग्गच्छति...।। ((न वहां आंख जा सकती है, न वाणी पहुंच सकती है)) विद्धि नेदं यदिदमुपासते...।।  ((कई बार ये मंत्र है)) ((जिन्हें ऐसा जानकर लोग उपासना करते हैं वो ब्रह्म नहीं हैं)) ...नो न वेदेति वेद च।। ((ये मंत्र भी उपनिषद् में कई बार आया है)) ((नहीं जानता हूं ये भी नहीं कहता।)) अविज्ञातं विजानतां विज्ञातम् अविजानताम्।। ((जानने का अभिमान रखने वालों के लिए जाना हुआ नहीं है.. जिन्हें अभिमान नहीं है उनका तो जाना ही हुआ है)) ...अग्नि अहमस्मीत्य ब्रवीज्जातवेदा।। ((मैं ही प्रसिद्ध अग्नि हूं, मैं ही जातवेदा के नाम से प्रसिद्ध हूं।)) ...वायुर्वा अहमस्मीत्य ब्रवीन्मातरिश्वा वा अहमस्मीति।। ((मैं ही प्रसिद्ध वायुदेव हूं, मैं ही मातरिश्वा के नाम से प्रसिद्ध हूं।।)) सा ब्रह्मेति होवाच..।। ((उमा देवी ने कहा, वे तो परब्रह्म परमात्मा हैं।)) तस्यैष आदेशो यदेतद्विद्युतो व्यद्युतदा।। उस ब्रह्म का आदेश है,
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श्वास लेने का ये तरीक़ा ज़िंदगी बदल सकता है

ऋषि मुन्नियों को वो गुप्त ज्ञान जिसके द्वारा उन्हें ओजपूर्ण ज़िंदगी और लंबी उम्र मिलती थी। जी हाँ यौगिक डीप ब्रीदिंग आपको एक नया जीवन दे सकता है। क्या है ये यौगिक श्वसन? क्दया आपने कभी एक नवजात बच्चे को श्वास लेते हुए देखा है? वो पेट ऊपर करते हुए श्वास लेता है और पेट अंदर करते हुए श्वास बाहर निकाल देता है। यानि पहले लंग्स के लोअर लोब में श्वास भरें फिर लंग्स के ऊपरी हिस्से तक। फिर जब श्वास छोड़ें तो पहले ऊपरी हिस्से से श्वास निकालें फिर पेट अंदर करते हुए पूरा श्वास बाहर कर दें। इसी पर मैंने अपने  यूट्यूब चैनल Yoga guru Kaushal Kumar Kamal पर डीटेल में यौगिक श्वसन की पूरी जानकारी दी है। इसे ज़रूर देखें और अपनी राय दें।  https://youtu.be/xpXsGRwXQ94

जी न्यूज पर दिल्ली पुलिस के कपड़े उतरे... सरकार का दुपट्टा सरका...

जैसे ही जी न्यूज पर बहादुर दामिनी के उस बहादुर दोस्त ने सच बताना शुरू किया.. दिल्ली पुलिस की चरित्र रूपी कपड़े उतरने लगे.. पहले लगा एक दो कपड़े ही उतरेंगे.. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.. दिल्ली पुलिस नंगी हो गई.. इतना ही नहीं केन्द्र सरकार का दुपट्टा भी सरक गया.. निर्दयी सरकार भी निर्वस्त्र हो गई.. दामिनी और उसका दोस्त 16 दिसंबर की रात सड़क पर पड़े तड़प रहे थे.. लेकिन अब निर्लज्ज दिल्ली पुलिस और बेशर्म सरकार लोगों के बीच नंगा है.. लेकिन इंतहा देखिए दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ता.. जरा पूरी कहानी सुन लीजिए.. दामिनी के दोस्त ने क्या क्या बताया.. दिल्ली पुलिस का पहला कपड़ा ऐसे उतरा.. बस डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक दिल्ली की चमचमाती सड़कों दौड़ती रही.. उसमें गैंगरेप होता रहा.. दरिंदे दामिनी की अंतरियां बाहर निकालते रहे.. दिल्ली पुलिस ने कहा, बस में सिर्फ चालीस मिनट तक तक ये सब हुआ.. झूठी और बेशर्म दिल्ली पुलिस.. डेढ़ घंटे तक काले शीशे वाली बस को नामर्द दिल्ली पुलिस ने क्यों नहीं रोका.. दामिनी के दोस्त ने दूसरा कपड़ा भी उतार दिया— दिल्ली पुलिस की दो- तीन पीसीआर वैन पहुंची लेकिन.. वो

दामिनी को दिल्ली पुलिस ने मारा ?

आज गैंगरेप पीड़ित दामिनी के लिए पूरा देश रो रहा है.. हर घर में लोग शोक मना रहे हैं.. चौक-चौराहों पर सिर्फ दामिनी की चर्चा है.. लेकिन एक सवाल जो इन सबके बीच दब गया है.. वो ये कि दामिनी को किसने मारा ? इस सवाल का जवाब ढूंढे उससे पहले दामिनी को श्रद्धांजलि.. हम उस साहसी लड़की के शोक संतप्त परिवार के साथ हैं.. साथ ही हमारी सहानुभूति देश के व्यवस्था की नाकामी से दरिंदों के शिकार हुए हर दामिनी के साथ है.. फिर वही सवाल की दामिनी को किसने मारा ? दामिनी को दिल्ली पुलिस ने मारा.. दामिनी को सोनिया-मनमोहन सरकार ने मारा.. दामिनी को शीला सरकार ने मारा.. दामिनी मरी नहीं मार दी गई है.. दिल्ली पुलिस को जिस काम में लगाया गया है वो काम नहीं कर पा रही है.. दिल्ली पुलिस दिल्ली के लोगों को सुरक्षा नहीं दे पा रही है.. बहन बेटियों की इज्जत यहां महफूज नहीं है.. ये दिल्ली पुलिस दरिंदों की साथी है.. चोर-बदमाशों उच्चकों की शुभचिंतक है.. इमानदार दिल्लीवालों के लिए ये दिल्ली पुलिस नहीं है.. और इस दिल्ली पुलिस की इस दशा के लिए सोनिया-मनमोहन की केन्द्र सरकार जिम्मेदार है.. दामिनी क मौत के बाद उसके मां-बाप को भ

क्या असीम का 'देशद्रोह' वाकई देशद्रोह है?

अंग्रेजों ने भारत पर हुकुमत कायम रखने के लिए और देशभक्तों को काबू में रखने के लिए देशद्रोह कानून बनाया था। उस वक्त इसे सैडीशन लॉ कहा गया, यानि देशद्रोह का कानून। लेकिन आजादी के बाद भारतीय संविधान में उसे अपना लिया गया। भारतीय दंड संहिता के अनुच्छेद 124 A के मुताबिक अगर कोई भी व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता है या बोलता है या फिर ऐसी सामग्री का समर्थन भी करता है तो उसे आजीवन कारावास या तीन साल की सज़ा हो सकती है। ब्रिटेन ने ये कानून अपने संविधान से हटा दिया है , लेकिन भारत के संविधान में ये कानून आज भी मौजूद है। आखिर क्यों ? मेरे हिसाब से तो गोले अंग्रेज चले गए लेकिन काले अंग्रेज जमे हुए हैं।

अन्ना के साथ साजिश !

अन्ना के साथ साजिश रची गई है, गहरी साजिश। अनशन की अनुमति मिली लेकिन जेपी पार्क में सिर्फ तीन दिनों की अनुमति मिली है। केन्द्र सरकार हर वो काम कर रहे हैं जिससे अन्ना के अनशन को रोका जा सके। अब तीन दिन के लिए जेपी पार्क की अनुमति का क्या मतलब है? इसके बाद वो क्या करेंगे? क्या अब इस देश में शांतिपूर्ण विरोध की भी आजादी नहीं है। हमारे वोट से चुनकर संसद में पहुंचे लोग अचानक इतने शक्तिशाली कैसे हो गए कि उन्हें हमारा डर भी नहीं ? बात किसी पार्टी विशेष की नहीं है। कांग्रेस जाएगी तो बीजेपी आएगी। सब तो एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। हमारे पास विकल्प क्या है? हम जनलोकपाल बिल की मांग कर रहे हैं लेकिन भ्रष्टाचारियों की फौज(नेता) राजी ही नहीं हैं। अब अन्ना को अपनी मांग रखने से भी साजिश के तहत रोक रहे हैं।

चक्रव्यूह में फंस गया देश

रोम जल रहा था, नीरो बंशी बजा रहा था। आज भी हालात ऐसे ही हैं। देश में घोटालों की बाढ़ आ गई है, सरकार काला धन वापस लाने को तैयार नहीं। गरीबी, बेरोजगारी से देश का दम निकल रहा है, लेकिन सरकार क्रिकेट के पीछे पागल है। समझ नहीं आ रहा एक खेल को इतनी तवज्जो क्यों ? बिहार में तो विधानसभा का सत्र आधे समय तक ही चलाने का फैसला लिया गया है ताकि विधायकों, मंत्रियों को मैच देखने में कोई दिक्कत न हो। हमारी मानसिकता को क्या हो गया। मुंबई पुलिस वानखेड़े में खेले जाने वाले फाइनल मुकाबले वाले दिन आम अवकाश घोषित करवाने की गुहार लगा रही है। क्या ये खेल का विकृत रूप नहीं है। प्रधानमंत्री मैच देखेंगे, सोनिया जी मैच देखेंगी, पाकिस्तान को न्योता भेजा गया है। हिंदी चैनलों में क्रिकेट के अलावा कोई खबर ही नहीं है। देश के गरीबों की भूख क्रिकेट से ही मिटेगी ! देश के बीमारों का इलाज क्रिकेट से ही होगा ! क्या पाकिस्तान पर जीत से आतंकियों का खात्मा हो जाएगा! कश्मीर समस्या का समाधान हो जाएगा! सड़क पर चाय की दुकान से लेकर फाइव स्टार होटल तक में क्रिकेट का बुखार चढ़ा है। असली मुद्दों से भटकाने के लिए सरकार भी मैच को खूब